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बारिश में दही खाना है ‘जहर’, 90% लोग नहीं जानते ये बात

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दही भारतीय खाने का एक अहम हिस्‍सा है. बच्‍चे से लेकर बूढ़ों तक दही सभी को खूब पसंद आता है. पाचन तंत्र को ठीक रखने का काम करने वाला ये हेल्‍दी फूड बारिश के मौसम में नुकसान देह साबित होता है. लेकिन इस का पता तकरीबन 90 प्रतिशत लोगों को नहीं होता है. आइए जानते हैं कि बारिश के मौसम में क्‍यों दही खाना सेहत के लिए अच्‍छा नहीं होता है..

आयुर्वेद के जानकार कहते हैं कि बारिश के मौसम में दही नहीं खाना चाहिए क्‍योंकि इस मौसम में दही बनाने वाले बैक्‍टीरिया पेट को नुकसान पहुंचाते हैं. दही में प्रोटीन ज्‍यादा होता है और बारिश के मौसम में ऐसी चीजें से परहेज करना चाहिए जो पित्‍त बढ़ाती हैं.

दही की तासीर ठंडी होती है और बारिश के मौसम में डॉक्‍टर ताजा और गरम खाना खाने की सलाह देते हैं. इस मौसम में हाजमा कमजोर हो जाता है और पेट में गैस बनती है तो ऐसी चीजें जिनसे गैस बनती हो या जो आसानी से हजम नहीं होतीं, न खाए।

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आयुर्वेद के मुताबिक सावन में वात का प्रकोप होता है और पित्त जमा हो जाता है. यही वजह है कि बरसात में दही नहीं खाने की सलाह दी जाती है. इन दिनों रात में दही बिल्कुल नहीं खानी चाहिए क्योंकि उस वक्त हमारी पाचन की क्षमता कम होती है. दही की जगह छाछ या लस्सी पी सकते हैं, लेकिन दिन में।

सर्दी, जुकाम, खांसी, अस्थमा आदि कफ वाले रोग हो तो दही ना खाएं क्योंकि इससे इन रोगों में बढ़ोतरी होगी. एसिडिटी या अल्सर होने पर दही न लें क्योंकि यह पित्त बढ़ाता है और उसमे मौजू एसिड से अलसर प्रभावित होंगे. शरीर में सूजन हो तो भी दही ना खाएं वर्ना सूजन बढ़ सकती है.

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